प्राइमरी कक्षाओं में विद्यार्थियों के साथ न जाने कितने सारे छोटे बड़े अनुभव जुड़े हुए है कि लगता है,एक पूरी बुक ही लिख दी जाए।
अपने अनुभव के आधार पर कह सकती हूं, प्राइमरी और वो भी क्लास वन सबसे डिफिकल्ट और चैलेंजिंग होता है ,आप तैयारी करके कुछ गए है और हो कुछ और ही जाता है , वहां नन्हे मुन्नों की पूरी फौज है और हर कोई अटेंशन चाहता है ,मैने कोई चार पांच एक्टिविटी तैयार की हुई है, कि 1 पीरियड के लिए पर्याप्त होंगी लेकिन रुकिए ये तो इन बाल गोपालो के लिए ऊंट के मुंह में जीरा है , हां जब तक आप एक्टिविटी करा रहे है बड़े मज़े लेंगे, बढ़िया खुश भी होंगे आपको अहसास दिला देंगे कि चल भईया हमने तुझे एक्सेप्ट किया लेकिन जैसे ही आप उन्हें लिखाने लगे या बोर्ड वर्क दे रहे है , शुरू इनकी नौटंकी।
मैं बोर्ड की ओर घूमी हूं और बमुश्किल 1 लाइन लिखी कि 2 छुटके छुटके भाग कर दूसरी जगह पहुंच गए, हल्की डांट लगाई,कुछ मनुहार लगाया कुछ समझाया ,राजा बेटा लिखेगा तभी तो अफ़सर बनेगा न, अब राजा बेटा कितना समझ रहा है नहीं मालूम लेकिन अफ़सर बनने के लिए बैठ तो जाएगा पर अभी दूसरी तरफ दो और मासूम शैतान उग जाएंगे अपनी शरारत के साथ , मैडम जी इसने मेरी पेंसिल ले ली , दोनों अपना अधिकार जता रहे है लीजिए भई अब जज बनिए, फैसला कीजिए और दोनों को संतुष्ट भी , अभी कहानी खत्म हुई क्या अभी तीसरे छोर से कुछ महाशय को वाशरूम जाना है,टेंशन ये होती है कि पता कैसे करे कि सही में जाना है या बगल वाले को जाते देख इन्हें भी प्रेरणा मिली है, पूछना पड़ता है और बोलना पड़ता है चलो बेटा ये 1 लाइन लिख लीजिए फिर जाना पर जनाब खड़े है ,तो क्या ज़ोर से लगी है, हां जोर से लगी है पर तभी पीछे से दो नारद मुनि निकल आएंगे , मैडम ये अभी थोड़ी देर पहले भी वाशरूम गया था इसको मत जाने दीजिए,अच्छा जी आपको बार बार बाहर जाना है , नहीं मैडम वो तो मैं बॉटल भरने गया था।
पूरा समय निकल जाता है इन छुटकी मुटकी समस्याओं से दो चार होते हुए , पता चला कि अब तो पीरियड ओवर होने वाला है ,पर रुकिए अभी ,आपको मन में परेशानी हो रही है , थोड़ी झुंझलाहट भी कि जो कराना था नहीं करा पाए न , तो वो नन्हे शैतान बड़ी ही मासूमियत से आयेंगे ,मैडम जी आप जा रहे हो,अभी मत जाओ ना , वाह मेरे बाल गोपालों, जब जब पढ़ा रहे तो पढ़ना नहीं और जब जा रहे है तो जाने भी न देना , ये तो अच्छा खेल चलता है आपका ।
ऐसा ही एक वाकया याद है, मेरी क्लास में दो छुटके थे , यूं समझ लीजिए राम और श्याम की जोड़ी थी एक श्याम सलोना ,पतला दुबला और दूसरा गौर वर्ण और गोलू गोलू , जो पतला दुबला था उसकी राइटिंग भी अच्छी थी और लिखता भी अच्छा था और जो गोलू गोलू था उसकी नोटबुक का न तो आवरण पृष्ठ का पता था और न ही उसे लिखने में कोई इंट्रेस्ट था , पर दोनों दिन भर साथ रहते ,कुछ समझाओ तो भी एक दूसरे से बात करते रहते या एक दूसरे के बाल खींचते रहते और mam ने कुछ कहा कि खिलखिलाते रहते ,कुल मिला कर वो एक दूसरे की दुनियां थे और उस दुनियां में बिल्कुल मस्त मगन थे, ऐसे ही एक दिन मैंने उस बच्चे को पकड़ लिया जिसका काम अधूरा, नोटबुक में कवर नहीं, बाल उलझे उलझे ,स्वेटर गंदा सा , जाने कितने दिनों से अन धुला , सच कहूं तो थोड़ी चिढ़ भी होती कि कैसे मां पिता है जो बच्चों को इतनी लापरवाही से स्कूल भेजते है, लेकिन सोचा इसमें बच्चे की तो गलती है नहीं उसे कहां इतनी समझ कि कैसे तैयार होना है लेकिन समझाना तो था तो उसे प्यार से पकड़ा और पूछा बेटा कॉपी में कवर क्यों नहीं है , कहते है न प्यार से तो कोई भी पिघल जाए तो ये तो मासूम बच्चा है, बस उसने पूरी मासूमियत के साथ बताना शुरू किया ,मैडम जी पापा बंबई गए है काम ढूंढने और मम्मी मामा के पास गई है तो जब मम्मी आ जाएगी तो कवर चढ़ा देगी , अब मेरी हालत खराब न मम्मी पास में, न पापा तो किसके पास रह रहे है आप , दादा दादी के पास , तो दादी जी खाना खिलाती है, हां ,ओह ..… अचानक मेरी खीज सहानुभूति में बदल गई और उस बच्चे को देखने का नजरिया भी , तो ऐसी कई कहानियां रहती है , एक बच्चा तो रोते हुए ही आता लेकिन जैसे ही मुझे देखता मेरा हाथ पकड़ लेता और चुप हो कर मज़े से प्रेयर में आ जाता ,ऐसा केवल मेरे साथ नहीं होता जो भी कक्षा 1 के मुख्य कक्षा शिक्षक या यूं कहिए शिक्षिकाएं थी ,उनसे बच्चें मां की तरह ही कनेक्ट हो जाते , आज जब उन में से कुछ बच्चों को बड़ी क्लास में बाल लहराते शर्ट बाहर निकाल कर भागते दौड़ते देखती हूं तो लगता है ये तो वहीं नन्हा शैतान है, लेकिन क्या बच्चों को ये कहानियां याद भी होगी शायद नहीं, लेकिन एक बात जरूर है क्लास 1 में पढ़ाना सचमुच में आल्हादित करने वाला अनुभव होता है , लगता है जैसे सारी दुनियां की मासूमियत और पवित्रता यहां बैठी हो और हां फिर से दोहराऊंगी सबसे ज्यादा चैलेंजिंग भी ।
आगे और कहानियां याद आए तो जरूर शेयर करूंगी आप मुझे कमेंट कर अपनी राय जरूर बताइएगा।
शेष शुभ
रागिनी गुरव
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