प्रिय अभिभावक, मैं आपके बच्चों की गणित की शिक्षक या शिक्षिका
आपसे कुछ बात कहना चाह रही हूं, क्या आप सुनने को तैयार है, मैं जानती हूं आपमें से अधिकांश के पाल्य किसी न किसी कोचिंग संस्था या नामी गिरामी ट्यूशन क्लासेज में जाते है, आप लोगों को शायद अपने बच्चों से बहुत उम्मीद भी है कि वे बेहद व्यस्त रहते है , दिन भर की भाग दौड़ में थक कर चूर हो जाते है, लेकिन जरा गौर से सुनिए जो मैं कहना चाह रही हूं, महोदय आपके बच्चें नहीं पढ़ रहे है , आपको शायद ये लगता होगा कि ट्यूशन, कोचिंग और स्कूल मतलब बच्चें तो आइंस्टाइन बन कर न भी निकले तो कम से कम फर्स्ट डिविजन तो ले ही आयेंगे लेकिन माफ़ कीजिएगा ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है , बच्चों से साधारण जोड़ने , घटाने, गुणा, भाग के सवाल भी नहीं बन पा रहे है , जिन प्रश्नों को बार बार ये कह कर समझाया गया कि ये या इस तरह के प्रश्न एग्जाम में जरुर आते है उसे भी करने में वे असमर्थ है , ज़रा रुकिए गलती कहां हैं, गलती कहां हो रही है, क्या रुक कर विश्लेषण करना चाहेंगे आप या हर किसी की तरह आप भी सारी गलतियों का ठीकरा शिक्षकों के सर पर डाल देना चाहेंगे।
नंबर 1 कक्षा 1 से 8 तक नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत बच्चें पास होते रहे , पर इसका अर्थ ये नहीं था कि बच्चों की सामान्य समझ की परख भी न की जा सके , कम से कम सामान्य दैनिक गणित के सवाल मौखिक रूप से तो उनसे पूछे जाने चाहिए और ये हर अभिभावक की जिम्मेदारी है, आपने देखा मेरा बच्चा गणित में कमज़ोर है, चलो ट्यूशन लगा देते है , बच्चा स्कूल में 7 घंटे बीता रहा है फिर ट्यूशन कोचिंग में 3 से 4 घंटे ,तो फिर उसके पास सेल्फ स्टडी का टाइम कब बचा ।
गणित एक ऐसा विषय है जो निरंतर अभ्यास के द्वारा ही मज़बूत बनता है वो कोई टूल या मशीन नहीं कि किसी मैकेनिक ने स्क्रू टाइट किया और आ गया , और ये सच है कि बच्चें सेल्फ स्टडी नहीं कर रहे हैं।
नंबर 2 मोबाइल की आदत , बच्चों को कुछ समझ नहीं आया तुरंत मोबाइल और चैट gpt की ओर भागते है , आप भी ये सोच कर उनके हाथ में मोबाइल दे देते है कि बच्चा पढ़ाई कर रहा है, लेकिन क्या उसने अपना दिमाग लगाया और दूसरी बात उसने क्या पढ़ाई का काम करने के तुरंत बाद मोबाइल आपको वापस किया , क्या आपको ज्ञात है कि आपका बालक या बालिका मोबाइल में कितना समय बिता रहा है।
नंबर 3 गणित में अलजेब्रा का बहुत ज़्यादा महत्व है , 2 प्लस 5 अपॉन 5 है तो इसका answer क्या होगा बच्चें बड़े मजे से 5 को कट कर आंसर 2 लिख रहे है जबकि जो कॉमन मिस्टेक है उसे मैं कई बार point out कर चुकी है , बच्चों को क्रॉस मल्टीप्लिकेशन नहीं आते , डेसिमल के सवाल तो उनके लिए अभी भी अनसुलझी पहेली है , सामान्य माइनस और डिविजन वे नहीं कर पा रहे है।
ऐसा नहीं है कि मैं इन गलतियों को नहीं देख पा रही हूं पर अगर बच्चा स्वयं अपना पात्र उल्टा कर के बैठ जाए तो उसमें कितना भी ज्ञान परोसा जाए वो तो बाहर ही बह जाएगा ।
कुछ बच्चों ने स्पष्ट कहा है कि वे स्कूल तो केवल मस्ती करने आते है पढ़ाई तो वे कोचिंग और ट्यूशन में करते हैं लेकिन मान्यवर अभिभावक ये आपके लिए खतरे की बहुत बड़ी घंटी है कृपया बच्चें की कोचिंग , ट्यूशन बंद करवाएं ये केवल उनका समय चूस रहे हैं, क्योंकि कोचिंग और वो भी नामी गिरामी कोचिंग उनका उद्देश्य कंपटीशन exam की तैयारी हो सकता हैं, लेकिन अगर आपके बच्चे का बेस ही क्लियर नहीं तो क्या वो competition फाइट कर सकेगा , पहले तो उन्हें ncert syllabus पूरा करने को कहे , अपने शिक्षकों का आदर करना सिखाएं , जो उन्हें नहीं आता , वे अपने गुरूर में मस्त है उन्हें लगता है स्कूल के शिक्षकों की उन्हें ज़रूरत नहीं है, अगर वास्तव में वे ऐसा सोचते है तो आप उन्हें ओपन में एग्जाम दिलवाए, क्योंकि अगर सोच ही गलत होगी तो हमारी सारी कोशिश " भैंस के आगे बीन बजाएं, भैंस खड़ी पगुराए" की तरह निरर्थक हो जाएंगी।
मैं आप सभी को अपने बच्चे की रैंडम चेकिंग के लिए आमंत्रित करती हूं, आप किसी दिन आइए अचानक और देखिए क्या आपका बच्चा उस दिन का सारा काम कर रहा है , क्या उसे सारी बातें समझ आई या उसने केवल टाइम पास किया ।
हमारे सामने विवशता है समय पर कोर्स पूरा करवाने कि, हम चाहे तो भी उनका 8 , 9 का बैकअप नहीं करा सकते लेकिन जब भी किसी भी बच्चें ने doubt किया हो हमने ज़रूर क्लियर किया है ।
अगर उस दिन का कोर्स बच्चा उसी दिन 3 से 4 बार समझ कर प्रैक्टिस कर ले तो कोई ताकत उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती लेकिन अफसोस ये हो नहीं रहा है , बच्चें अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे है , अगर इसमें अभिभावकों का सहयोग न मिला तो स्थिति icu में पहुंच जाएंगी ।
उम्मीद है आप सहयोग करेंगे
शेष शुभ
बच्चों की गणित शिक्षक
रागिनी गुरव
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