विद्यालय में चर्चा चल रही थी कहीं चलते हैं साथ साथ क्योंकि सोचते सोचते बहुत दिन बीत जाते है , मैने कहा यदि कही दूर नहीं जा सकते तो अपने पड़ोस में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर आते है , हम घूमने के उद्देश्य से नहीं ईश्वर के दर्शन के उद्देश्य से जाएंगे तो ईश्वर ही प्रबंध भी कर देंगे , बस टिकट बुकिंग हुई , जिस दिन गर्मी की छुट्टियां लगनी थी उसी दिन रात की ट्रेन बीकानेर बिलासपुर से, वहां सीता mam भी मिल गई उनका ट्रांसफर हो गया था राजस्थान, मैं, शिवानी mam , उनकी माताजी और हमारी नन्हीं बॉस केशू , सफर आराम से बीता , निर्विघ्न और साथ जो परिवार था बोगी में उनके साथ भी अच्छे से चर्चा होती रही उनके साथ जो नन्हा अक्षय था वो तो केशू को मेरा है कहने लगा। स्टेशन में गाड़ी सही समय पर पहुंच गई, कोई 12 बजे के आसपास हम स्टेशन में थे विचार ही कर रहे थे कैसे जाए , कहां ठहरे , e रिक्शा के एक ड्राइवर ने 20 रुपए प्रति सवारी में तय किया उन लोगों का कमिशन बंधा होता है लेकिन हमें भी सौदा महंगा नहीं लगा , हम सबने उसी के दिखाए होटल जुगनू में रूम ठीक किया , नहा धो कर माताजी के लिए रूम में ही खाना मंगाय...