लेडीज़ बोगी में खुलकर खिलखिलाती है महिलाएं
दो की सीट में तीन और तीन की सीट में चार सफर करती मिल जाती है महिलाएं।
और तो आराम से बोगी के फर्श में भी बैठी नज़र आती है महिलाएं।
अक्सर ऑफिस की कशमकश को मस्ती और हंसी में उड़ाती नज़र आती है महिलाएं।
सुबह- सुबह की भागमभाग में बिना तैयार हुए आई और ट्रेन में ही खुद को संवारती दिख जाती है महिलाएं।
अनजान महिला सहयात्रियों से भी अपनी फीलिंग्स बांटती नज़र आ जाती है महिलाएं।
पेट पूजा हो या ऑफिस के काम या हो पढ़ाई प्रतियोगिता का सवाल, इस सफ़र में निबटाती नज़र आ जाती है महिलाएं।
कुछ पुरुष सहयात्री जब जबरन चढ़ जाते है लेडीज़ बोगी में तो पहले तो विनम्रता से समझाती है महिलाएं।
अगर समझ गए तो ठीक नहीं तो दूसरे विकल्प में उतर आती है महिलाएं।
कुछ कहते है जब महिला पुरुष में फर्क नहीं तो ये विशेषाधिकार महिलाओं को ही क्यों?
तो प्रस्तुत है इसका भी जवाब
जनरल बोगी में सब तो नहीं पर कई अनजान पुरुषों के अनचाहे स्पर्श को क्यों करें स्वीकार।
मुख में गुटखा पान और न जाने क्या-क्या चबाते, अनजाने में और कभी जान कर भी किसी महिला के ऊपर जबरन गिरने वालों को कैसे न करें इनकार।
और कभी खाली मिले बोगी तो आराम से पैर पसार के बैठ सके, इस सुख से वंचित होना क्यों करें स्वीकार।
कभी आनन फानन में अपने बेतरतीब ड्रेस को संवार ले, क्यों करें किसी के घूरती नज़र का इंतज़ार।
कई बार कुछ महिलाएं ही अपने साथ पुरुष सहयात्रियों को सफ़र कराने हेतु अड़ जाती है
प्रिय बहन, तुम हो सहज उनके साथ हम नहीं।
ये लग्ज़री नहीं हमारी ज़रूरत है, जाने कितनों को सहजता से सफ़र करा रही है यह रोज की ट्रेन
धन्यवाद हमारा स्वीकार करें, हे कानून के जानकार।
अनुगृहित है हम सभी महिलाएं ।
हैप्पी journey to all ।
रागिनी गुरव
स्नातक शिक्षक गणित
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