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Showing posts from February, 2023

साक्षात्कार: एक सोच

 आज साक्षात्कार पैनल में जब मेरे नाम की घोषणा हुई तो थोड़ा आश्चर्य ,थोड़ी घबराहट और थोड़ी उत्तेजना भी महसूस हुई , पता नहीं मैं न्याय कर पाऊंगी या नहीं ,सही मूल्यांकन हो सकेगा या नहीं,लेकिन आज बात इंटरव्यू लेने के अपने अनुभव की। करीब डेढ़ से 2 सौ अभ्यर्थी थे ,प्राइमरी टीचिंग job के लिए, अधिकतर तो न्यूनतम योग्यता से ज्यादा ही थे ,काफी उच्च प्रशिक्षित ,कुछ इंजीनियर भी ,कुछ मैनेजमेंट वाले भी ,क्योंकि न्यूनतम योग्यता 12 th पास थी इसलिए अधिकांश ने आवेदन किया था ,लेकिन साक्षात्कार लेने के दौरान कई बातें आई जेहन में जिसे साझा करना चाहती हूं। इतनी भारी संख्या में अभ्यर्थियों के होने के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की संख्या बेहद कम थी , मैंने देखा है लोग अक्सर सिस्टम को दोष देते है बेरोजगारी के लिए लेकिन इतनी भारी भरकम डिग्री होने के बावजूद जिस योग्यता की हम तलाश कर रहे थे वो बहुत कम लोगों में ही थी या कई लोगों को संभवत ये लगा होगा कि प्राइमरी में क्या पढ़ाना है ये तो बहुत आसान है .... कई अभ्यर्थी तो कम्युनिकेशन स्किल्स में ही कट जा रहे थे ,हम बचपन से बच्चों को सिखाते है ,किसी पेड़ के बारे में ...

कैसी ये सोच

 आज ऑफिस में मिसेज नलिनी दिखी ,अभी अभी दिल्ली से लौटी है ,ऑफिशियल काम से ,परीक्षा पे चर्चा पर बच्चे को लेकर गई थी ,सब बहुत बढ़िया रहा ,मेरी नज़र अटकी उनके सूट में ,जैकेट वाला कुर्ता था ,मैने सहजता में पूछा ,राजधानी की खरीदारी ,ये सूट तो बढ़िया है ,no need of दुपट्टा ,वो मुस्कुरा दी , no need दुपट्टा , सुबह तो थी बिना दुपट्टा के,लेकिन कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगा ,कहने लगे ये दिल्ली नहीं है,दुपट्टा ले लो ,मुझे समझ नहीं आया ,भला जैकेट वाले सूट में दुपट्टा क्यों ज़रूरी है, हां कोई शौकिया लेना चाहे तो अलग बात है और तो जिस महोदया ने मना किया था वो खुद कई बार साइड दुपट्टा लेकर आ चुकी है ,अगर इतना ही अपरिहार्य है तो बिलकुल टिपिकल अंदाज में ले। वैसे भी ढीले ढाले कुर्ते के ऊपर कई बार दुपट्टे की आवश्यकता नहीं होती ,और मैंने मुंबई में भी वर्कशॉप में यंग से old सभी रिसोर्स पर्सन को ढीले कुर्ते और जींस में ही देखा ,और वे बेहद कंफर्ट भी थे ,लेकिन ये कहना कि ये दिल्ली नहीं है या ये मुंबई नहीं है ,तो बेहद संकीर्ण सोच है ,आखिर दिल्ली ,मुंबई भारत में ही तो है ना । कुल मिलाकर मुझे तो यहीं समझ में आता ...

राम भरत मिलाप

श्री राम चरित मानस का सर्वाधिक हृदयस्पर्शी प्रसंग है राम भरत मिलाप,आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक भी । आज जब सारी पार्टियों में केवल राजसत्ता पाने के लिए जोड़तोड़ लगी रहती है और धन सम्पत्ति के लिए लोग नाते रिश्तेदारों से भी बैर कर बैठते है ऐसे में राम भरत मिलाप की कहानी अत्यंत भावुक कर देती है एक ओर राम है ,जो नहीं चाहते कि केवल बड़े भाई होने के नाते मुझे राजगद्दी मिले और दूसरी और भरत है जो जब श्री राम के वन गमन की बात सुनते हैं तो स्वयं को ही दोषी ठहराने लगते है, वे  नहीं चाहते, स्वयं राज करें ,वह राज जो उन्हें तश्तरी में परोसा गया था, उनके पिता ने वचन दिया था, माता ने उसके लिए प्रपंच रचा था, उस राज को भी कतई नहीं स्वीकार कर पाते, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके बड़े भाई के साथ छल हुआ है,जबकि माताएं,गुरुजन सभी उन्हें राजा के रूप में देखने के लिए तैयार है। उनका पश्चाताप, उस भूल के लिए जो उन्होंने किया ही नहीं, अपने आराध्य बड़े भ्राता के दुःख की वेदना और उस वेदना को महसूस करती है माता कैकई ,माता सुमित्रा और माता कौशल्या और महसूस करती है सारी अयोध्या ,लोग भरत के इस आग्रह को देख इस उम्मीद ...