आज साक्षात्कार पैनल में जब मेरे नाम की घोषणा हुई तो थोड़ा आश्चर्य ,थोड़ी घबराहट और थोड़ी उत्तेजना भी महसूस हुई , पता नहीं मैं न्याय कर पाऊंगी या नहीं ,सही मूल्यांकन हो सकेगा या नहीं,लेकिन आज बात इंटरव्यू लेने के अपने अनुभव की। करीब डेढ़ से 2 सौ अभ्यर्थी थे ,प्राइमरी टीचिंग job के लिए, अधिकतर तो न्यूनतम योग्यता से ज्यादा ही थे ,काफी उच्च प्रशिक्षित ,कुछ इंजीनियर भी ,कुछ मैनेजमेंट वाले भी ,क्योंकि न्यूनतम योग्यता 12 th पास थी इसलिए अधिकांश ने आवेदन किया था ,लेकिन साक्षात्कार लेने के दौरान कई बातें आई जेहन में जिसे साझा करना चाहती हूं। इतनी भारी संख्या में अभ्यर्थियों के होने के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की संख्या बेहद कम थी , मैंने देखा है लोग अक्सर सिस्टम को दोष देते है बेरोजगारी के लिए लेकिन इतनी भारी भरकम डिग्री होने के बावजूद जिस योग्यता की हम तलाश कर रहे थे वो बहुत कम लोगों में ही थी या कई लोगों को संभवत ये लगा होगा कि प्राइमरी में क्या पढ़ाना है ये तो बहुत आसान है .... कई अभ्यर्थी तो कम्युनिकेशन स्किल्स में ही कट जा रहे थे ,हम बचपन से बच्चों को सिखाते है ,किसी पेड़ के बारे में ...