आज टीवी पर ' एक दूजे के लिए' फिल्म देख रही थी ,हालांकि ये फिल्म पहले भी कई बार देख चुकी हूं और ये भी मालूम है कि फिल्म अपने समय की सुपरहिट थी,लेकिन फिर भी फिल्म के अंत को देखने का मन नहीं किया, पता नहीं कोई इतना क्रूर कैसे हो सकता है,केवल दुखांत करने के लिए अच्छी खासी कहानी का सत्यानाश कर दिया है । हो सकता है ये केवल मेरी सोच हो लेकिन जरा कहानी में जाइए एक बेहद प्यारी सी लव स्टोरी जिसमे लड़का लड़की एक दूसरे की भाषा नहीं जानते लेकिन फिर भी प्रेम कर बैठते है ,मधुर गीतों से सजी फिल्म ,उम्दा अभिनय सभी कलाकारों का ,भाषा की समझ न होने के कारण एक दूसरे को समझाने के अलग अलग तरीके ढूंढना ,कुल मिलाकर कहानी में रोचकता की कोई कमी नहीं , ऊपर से कमला हासन टीना मुनीम और माधवी जैसे कलाकार उनके चेहरों का ताजापन । जब समाज उनके प्रेम को स्वीकार नहीं कर पाता तो विद्रोह और एक साल का वियोग ,इस वियोग में भी एक दूसरे को टूट कर चाहना ,सचमुच में एक उच्च किस्म की लव स्टोरी थी । कुछ समय के लिए कमला हासन यानी वासु के पात्र को जो भ्रम होता है उसे तोड़ने के लिए एक दूसरी अभिनेत्री माधवी जो स्वय...