बच्चों की मजबूरी और परेशानी
कक्षा २ में एक कविता है बादल भईया बहुत हुआ
उसी से प्रेरित है ये कविता
कोरोना काका बहुत हुआ
त्राहि त्राहि सर्दी भारी
जाए कहां , कहां पर खेलें
घर में फंसे बोरियत झेले
ज्यों पिंजरे में मौन सुआ
कोरोना काका बहुत हुआ
अब थोड़े गुस्से में
कोरोना कीड़ा बहुत हुआ
त्राहि त्राहि मचाते हो?
नज़र नहीं पर तुम आते हो?
वैक्सीन के दो टीके लगाकर
मास्क मुख पर लगाकर
सामाजिक दूरी अपनाकर
तुमको दूर भगाएंगे
तुमने क्या सोचा था
तुझसे हम घबराएंगे
छुपकर ऊधम मचाते हो
हमें घर में fansate हो
तुमने क्या सोचा था
तुझसे हम डर जायेंगे
क्या हम पढ़ नहीं पाएंगे
तुम्हें हम बताते हैं
स्कूल को घर में बुलाते हैं।
कोरोना कीड़ा बहुत हुआ
अब तुम अपने घर जाओ
वहा चुपचाप आराम फरमाओ
हमें अब स्कूल जाना है
शिक्षा सही तरह से पाना है
कोरोना हाय बहुत हुआ़
रागिनी गुरव
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