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  कोविड महामारी पर निबंध

An essay on challenges and opportunities of online education COVID 19

समय पंख लगाकर उड़ रहा था कि अचानक एक अनजान से परजीवी ने आकर सब कुछ बदल दिया ,ना केवल देश बल्कि सारी दुनिया की तहजीब बदल डाली इस 🦠🦠 वायरस ने ,एक आतंक और दहशत का माहौल व्याप्त हो उठा चारों ओर,लगातार  आंकड़ों में केवल एक गिनती नहीं अपितु चिंता की अधिकता भी सम्मिलित थी, भविष्य की अनिश्चितता भी थी ,रोजगार ,शिक्षा  सारी व्यवस्थाएं बदल गई लोग अचानक से आए इस परिस्थिति से सामंजस्य बिठाने हेतु संघर्ष करते दिखे । स्वास्थ्य आज ना केवल सरकार की अपितु आम जनमानस की भी प्राथमिकता में शामिल हो गया ।

आज हम चर्चा करेंगे कोविद महामारी ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या परिवर्तन लाए इसके फायदे और नुकसान क्या है।

सबसे पहले नुकसान 

अब बच्चें पहले की तरह बस्ता पकड़ कर दौड़ते भागते स्कूल नहीं आ रहे , स्कूल सुनसान पड़े है ,क्लासरूम में शिक्षक अकेला अपने डिवाइस में प्रयासरत है,शिक्षा किसी तरह पहुंच जाए बच्चों तक,

आज ऑटो में पीछे लटकते हुए बच्चें नहीं दिखाई दे रहे,ऑटो वाले को ,रिक्शे वाले को और तो और अभिभावकों को भी लाख समझाइश देने के बाद भी भीड़ अपने वाहन में भरने की जिद अब कही पीछे छूट गई लगती है ,अभी स्कूल में हुए सर्वे में अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को शाला भेजने से इंकार करते पाए गए । कहीं ना कहीं एक अनिश्चितता का भाव है सब जगह ऑनलाइन या आभासी मोड़ से शिक्षा जारी है लेकिन इसमें कुछ छूट गया है , कुछ खो गया है ,वो उनमुक्त कोलाहल ,वो मस्ती भरी खिलखलाहट,वो मॉर्निंग असेंबली ,वो खेल का मैदान ,वो साथ में टिफिन शेयर करना ,वो शिक्षक का शाबासी देना ,वो दोस्त बनाना और फ्री पीरियड का इंतजार ,सब कुछ सब कुछ जी हा विद्यालय केवल शिक्षा के मंदिर नहीं है वहां विद्यार्थी सामाजिक व्यवहार भी सीखते है ,मंच पर जाकर एक आत्मविश्वास से भरते बच्चें ,गेम्स पीरियड मे चहकते बच्चें ,किसी विशेष शिक्षक का इंतजार करते बच्चें ,किसी खास दोस्त का इंतजार करते बच्चें सब कुछ छूट गया है और ये भी निश्चित है अब अगर स्कूल खुल भी गए तो सब कुछ पहले जैसा नहीं रहने वाला , ऑनलाइन में कैमरा बंद कर बच्चें क्या कर रहे है इस पर दृष्टि भी बहुत कम जा पा रही है , जहां पहले इस बात पर चर्चा होती थी कि बच्चों को मोबाइल से कैसे दूर रखा जाए आज उनके हाथों में इस जादुई डिब्बे को देना एक मजबूरी बन चुकी है ,बच्चे पढ़ाई ऑनलाइन कर रहे है और एग्जाम भी ऑनलाइन ही दे रहे हैं और इस बात को हर कोई जानता है कि बच्चे ही नही अभिभावक भी अपने बच्चों को नकल करने से रोक नहीं रहे है ,शिक्षक कड़ी मेहनत कर जो विषय बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है एग्जाम के वक्त वे उत्तर नदारद होते है और गूगल बाबा की कृपा से ऐसे उत्तर दिखाई देते है जो कई बार हमने भी नही सुने होते ,किसी तरह से एग्जाम उत्तीर्ण करना और अगली क्लास में प्रोनत्त ( प्रमोट) हो जाना ही आज एक उद्देश्य रह गया है ,शिक्षा कही पीछे छूट गई है ।

केवल यही नहीं जिन बच्चों के पास डिवाइस नहीं है अथवा नेटवर्क की समस्या है उनकी स्थिति तो और खराब है वे तो

 संभवतः पढ़ना और लिखना भूल ही चुके है ।

हां यहां एक भेद और स्पष्ट उभर कर आया है कई लड़कियां जो पहले कम से कम स्कूल जा कर शिक्षा तो अर्जित कर ही रही थी आज घर में होने के कारण घर के कार्यों में उलझी हुई है, हालांकि घर का कार्य करना बुरा नही है परन्तु पढ़ाई भी ना रुके ये व्यवस्था सुनिश्चित करना अब केवल अभिभावक के ही हाथ में है।

हां जहा इतनी नकारात्मक बाते हुई वहा कुछ सकारात्मकता भी है ,आज की जेनरेशन के बच्चें ना जाने किस दौड़ में है ,लगातार भागे जा रहे है, school फिर कोचिंग फिर फलानी क्लास तो यहां वहा ना जाने क्या क्या ?

कम से कम ये दौड़ थमी है ,बिना टिफिन खाए ,असेंबली में गिरते हुए बच्चें अब नहीं है । ऑनलाइन पढ़ाई के कारण आपा धापी भी थमी है , उस पर हम आज तकनीक में जितना माहिर हुए है संभवतः कोविद नहीं होता तो ये सीखने में १० साल लगते , उस पर ऑनलाइन क्लास , ऑनलाइन मीटिंग के कारण अनर्गल पैसों की बर्बादी भी रूकी है सिर्फ अब स्वयं में ईमानदारी बरतने की जरूरत है ,कम से कम एग्जाम ऑफलाइन होने चाहिए जिससे सही आंकलन हो सके ।

अंत में सिर्फ इतना कि

हर दौर कुछ सीखा जाता है

थोड़ा सा हंसा और थोड़ा सा रूला जाता है

बस समय को जरा सम्हाल कर थामना दोस्तों

क्योंकि समय से बड़ा कोई इंसान नहीं होता है।

शेष शुभ

रागिनी Gurav




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