आज creatve and critical thinking पर चर्चा - हुई, सहकर्मियों के साथ। हालांकि सभी कई बार इस प्रकार की चर्चा में भाग ले चुके थे और कई लोग इस शब्द से भी परिचित थे, परंतु मुझे जो समझ में आया मैं अपने विचार यहां व्यक्त कर रही हूं ।
एक उदाहरण से अपनी बात स्पष्ट करना चाहूंगी, जैसे हमने कक्षा में विद्यार्थियों से कहा एक थाली तैयार करो बैलेंस डाइट की, अब हर बच्चे का यह आकलन अलग अलग होगा इसे वह विभिन्न प्रकार से तैयार कर सकता है हां हमने यह शर्त जरूर रख दी है कि प्रोटीन 25%, वसा 10%, कार्बोहाइड्रेट 25% विटामिन एंड मिनरल्स 40% हो, यह व्यवस्था जरूर होनी चाहिए अब यह बच्चे की खुद की सोच होगी कि वह थाली किस तरह से तैयार करें ,प्रोटीन युक्त पदार्थ होते हैं वह चाहे तो दूध ले चाहे तो अंडा ले चाहे तो मीट ले या फिर दाल ले, उसकी इच्छा है इसी प्रकार से विटामिंस और मिनरल्स लेने के लिए भी वह अलग-अलग सब्जियों और फलों का इस्तेमाल कर सकता है कुछ विद्यार्थियों को या कुछ व्यक्तियों को यहां पर फैट या फाइबर के लिए अलग पदार्थ पसंद हो सकता हैं, किसी को कोई अलग , एक बच्चे ने तो यह भी प्रश्न पूछ लिया कि क्या हम समोसा रख सकते हैं तो दूसरे ने तपाक से उत्तर दिया समोसा अगर लेना है तो आधा ही लेना वरना मैडम उसे अनहेल्दी डाइट मे रख देगी। तो ,इस तरह से अनेक सवालात आते हैं पर क्रिएटिव थिंकिंग का अर्थ होता है कि जहां पर विद्यार्थी अलग अलग तरीके से अपनी रचनात्मक सोच को प्रदर्शित करें अर्थात क्रिएटिव थिंकिंग या रचनात्मक सोच हर व्यक्ति के लिए अलग अलग हो सकती है, हर बच्चे के लिए अलग-अलग हो सकती है और ओपन mindedness के साथ हमें इसे स्वीकार करना होगा, खुली सोच के साथ हमें इसे स्वीकार करना होगा।
इसे हम कहते हैं रचनात्मक प्रयास , परंतु क्रिटिकल थिंकिंग या आलोचनात्मक सोच में तरीके अलग हो सकते है परन्तु इसका सलूशन जो होगा या इसका उत्तर जो होगा वह केवल और केवल एक ही होगा इसको भी हम एक उदाहरण से समझते हैं जैसे अर्जुन को द्रौपदी स्वयंवर में द्रौपदी को प्राप्त करना है और इसके लिए अर्जुन के समक्ष एक शर्त है,
न केवल अर्जुन बल्कि वहां पर जितने भी स्वयंवर के लिए युवा राजकुमार थे उन सभी के समक्ष एक शर्त थी और शर्त यह थी कि उन्हें मछली की आंख में उसके प्रतिबिंब को देखते हुए तीर मारना है और जो मछली की आंख में तीर चला देगा वही विजेता घोषित किया जाएगा तो यह इसके लिए कितनी सारी बातों की जानकारी ध्यान में रखनी होती है, सबसे पहले तो आपको आंकलन करना होगा मछली का वेग वास्तव में कितना है मछली अपने प्रतिबिंब में किस वेग से गति कर रही है, इसके बाद आपको मछली की आंख पर फोकस करना है आपको सारी बातों का एक विश्लेषण करना है और इसके बाद भी सबसे जरूरी बात यह है कि आपको दोबारा चांस नहीं मिलेगा आपके पास केवल एक ही तीर होगा ,एक ही अवसर होगा और आपको उस एक तीर के द्वारा ही मछली की आंख को भेदना है ,
अगर आपने यह सोचने का प्रयास किया कि नहीं मैं एक के बाद दूसरे प्रयास में सफल हो जाऊंगा या तीसरे प्रयास में सफल हो जाऊंगा तो यह क्रिटिकल थिंकिंग की श्रेणी में नहीं आएगा तब आप द्रौपदी से हाथ धो बैठेंगे तो इसलिए सबसे जरूरी चीज है क्रिटिकल थिंकिंग में हमें इन सभी बातों को ध्यान रखना है हमें विश्लेषण करना है हमें ध्यान रखना है कि इसका उत्तर क्या हो सकता है और सारे सलूशन एक ही पॉइंट पर फोकस होने चाहिए और उसके बाद हमें अपनी परिणाम की घोषणा करनी होगी और उस क्रिटिकल थिंकिंग सही सार्थक निकल कर आना चाहिए।
तो यह फर्क है, रचनात्मक सोच का अर्थ होता है अलग-अलग व्यक्तियों की अलग-अलग सोच एक से ही कार्य को नए तरीके से करने की सोच इसमें यह व्यक्ति व्यक्ति अलग हो सकता है लेकिन क्रिटिकल थिंकिंग का उत्तर सदैव एक ही होगा और इसका इसके लिए गहन सोच गहन विश्लेषण और बहुत ज्यादा ध्यान रखने की आवश्यकता है।
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