आज कक्षा पहली में arrangement period tha सोचा चलो आज बच्चों से ड्राइंग बनाई जाए ड्राइंग में क्या बनाएं तो मैंने अपने एक्सपीरियंस से उन्हें एक रंगोली बनाना सिखाया क्योंकि मैं भी बचपन में 6 से 6 दिए वा।ली रंगोली बनाया करती थी शायद मेरी पहली रंगोली यही थी मुझे लगा बच्चों को यही सीखने में आसानी होगी
चलो यही बनाते है
मैंने बोर्ड में ६ खड़े और ६ आड़े डॉट लगाए और अपना favourite दिए वाली रंगोली बनानी शुरू की।
बच्चों ने भी मेरे साथ बनाना शुरू किया पर बच्चे तो बच्चें ठहरे।कहीं डॉट उपर नीचे तो कहीं दिया छोटा बड़ा ।
कुछ होशियार निकले बना भी लिए और कलर भी कर लिए पर कई बच्चों को दिक्कत भी हो रही थी।मैंने यथासंभव उनकी मदद करना शुरू किया, एक एक बेंच में जा कर देख भी रही हूं किसी को डॉट बनाने में तो किसी को दिया बनाने में तो किसी को कलर भरने में भी ।
ऐसे ही एक छोटे बच्चे के पास उसकी छोटी सी कुर्सी के बगल में जो एक और छोटी कुर्सी थी उसमें बैठ गई और उसके टेबल में चाक से डॉट बनाने लगी और उसे समझाने भी।
देख देख कर उसने भी बनाना शुरू किया ,कई बार बोर्ड से बच्चें नहीं समझ पाते पर पास जा के समझाओ तो समझ जाते है ।
फिर मैंने अपने हाथ से टेबल में लिखा मिटा दिया मेरे हाथ में पूरा चाक ही चाक ,वैसे हम शिक्षकों के लिए ये बड़ी ही सामान्य बात है,हाथ में ,मुंह में , बालो में,कभी कभी मुंह के अंदर भी चाक पाउडर।
पर उस बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत से अपना रुमाल निकाला और मुझसे कहा मेम हाथ से मत पोछिए,रुमाल से पोछिये,ऐसा करते हुए उसने टेबल भी पोछ दिया और मेरा हाथ भी ,मैंने भी उसके सामने अपना हाथ पीछे की तरफ का भी दिखा दिया वहां भी चाक लगा था। बच्चें ने वह भी पोंछ दिया ।मुझे बड़ा मजा आया अब मैंने एक और छोटी रंगोली उसके टेबल में बनाई,उसने इस बार भी मेरा हाथ आगे पीछे से साफ कर दिया।मुझे भी शरारत सूझ गई अब मैंने ३-४ बार रंगोली बनाई उसे पोछा और चुपचाप से उसके सामने हाथ कर दिया वो बच्चा भी बड़ी ही तल्लीनता से मेरा हाथ पोच्छता,फिर अपनी रंगोली बनाता।और आखिर उसने अपनी दिए वाली रंगोली पूर्ण भी कर लिया मैंने उसे good भी दे दिया।और भी बच्चें आसपास आ गए थे अपनी अपनी रंगोली लेकर ।शायद बच्चों को मेरा उनके साथ बैठ कर उन्ही में से एक बन जाना भा गया उनमें से एक बच्चें ने कह ही दिया mam आप बहुत अच्छे लगते हो, फिर दूसरे ने भी,तीसरे ने भी ।
मै मुस्करा उठी, जानती थी ,मैंने कुछ खास नहीं किया ,लेकिन मासूम बचपन के साथ कुछ पल के लिए मै भी हल्की हो उठी थी।
चलो यही बनाते है
मैंने बोर्ड में ६ खड़े और ६ आड़े डॉट लगाए और अपना favourite दिए वाली रंगोली बनानी शुरू की।
बच्चों ने भी मेरे साथ बनाना शुरू किया पर बच्चे तो बच्चें ठहरे।कहीं डॉट उपर नीचे तो कहीं दिया छोटा बड़ा ।
कुछ होशियार निकले बना भी लिए और कलर भी कर लिए पर कई बच्चों को दिक्कत भी हो रही थी।मैंने यथासंभव उनकी मदद करना शुरू किया, एक एक बेंच में जा कर देख भी रही हूं किसी को डॉट बनाने में तो किसी को दिया बनाने में तो किसी को कलर भरने में भी ।
ऐसे ही एक छोटे बच्चे के पास उसकी छोटी सी कुर्सी के बगल में जो एक और छोटी कुर्सी थी उसमें बैठ गई और उसके टेबल में चाक से डॉट बनाने लगी और उसे समझाने भी।
देख देख कर उसने भी बनाना शुरू किया ,कई बार बोर्ड से बच्चें नहीं समझ पाते पर पास जा के समझाओ तो समझ जाते है ।
फिर मैंने अपने हाथ से टेबल में लिखा मिटा दिया मेरे हाथ में पूरा चाक ही चाक ,वैसे हम शिक्षकों के लिए ये बड़ी ही सामान्य बात है,हाथ में ,मुंह में , बालो में,कभी कभी मुंह के अंदर भी चाक पाउडर।
पर उस बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत से अपना रुमाल निकाला और मुझसे कहा मेम हाथ से मत पोछिए,रुमाल से पोछिये,ऐसा करते हुए उसने टेबल भी पोछ दिया और मेरा हाथ भी ,मैंने भी उसके सामने अपना हाथ पीछे की तरफ का भी दिखा दिया वहां भी चाक लगा था। बच्चें ने वह भी पोंछ दिया ।मुझे बड़ा मजा आया अब मैंने एक और छोटी रंगोली उसके टेबल में बनाई,उसने इस बार भी मेरा हाथ आगे पीछे से साफ कर दिया।मुझे भी शरारत सूझ गई अब मैंने ३-४ बार रंगोली बनाई उसे पोछा और चुपचाप से उसके सामने हाथ कर दिया वो बच्चा भी बड़ी ही तल्लीनता से मेरा हाथ पोच्छता,फिर अपनी रंगोली बनाता।और आखिर उसने अपनी दिए वाली रंगोली पूर्ण भी कर लिया मैंने उसे good भी दे दिया।और भी बच्चें आसपास आ गए थे अपनी अपनी रंगोली लेकर ।शायद बच्चों को मेरा उनके साथ बैठ कर उन्ही में से एक बन जाना भा गया उनमें से एक बच्चें ने कह ही दिया mam आप बहुत अच्छे लगते हो, फिर दूसरे ने भी,तीसरे ने भी ।
मै मुस्करा उठी, जानती थी ,मैंने कुछ खास नहीं किया ,लेकिन मासूम बचपन के साथ कुछ पल के लिए मै भी हल्की हो उठी थी।
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